सुधी पाठकों से मेरा अनुरोध है कि वे श्रीलोकचरित मानस’ को व्यक्तिगत आक्षेप की सीमा के बाहर खड़े होकर ही देखें और काव्यानन्द का रसास्वादन करें। उनका परम दायित्व है कि वे जिज्ञासा और षोध दृष्टि से यह चिन्तन करें कि क्या इस कृति की व्यक्तिपरिवार समाज और देशोद्धार में कोई रचनात्मक भूमिका हो सकती है।

  • Publisher    : Shubhda Prakashan
  • Language    : Hindi
  • Paperback   : Pages
  • ISBN-13       : 978196210427
  • Reading Age : 6 Years And Up
  • Country Of Origin : India
  • Generic Name : Book